199 🌈 जब कौआ था रंग-बिरंगा कहा जाता है कि बहुत पहले कौआ काला नहीं था। उसके पंख रंग-बिरंगे और चमकीले थे। वह अन्य पक्षियों से भी अधिक सुंदर दिखता था। उसकी उड़ान आसमान में इंद्रधनुष जैसी लगती थी। उसी समय पृथ्वी पर भयंकर सूखा पड़ा। नदियाँ सूख गईं। तालाब खाली हो गए। पशु-पक्षी प्यास से तड़पने लगे। चारों ओर संकट छा गया। देवताओं ने धरती को बचाने का निश्चय किया। उन्होंने पाताल लोक से जीवनदायी अमृत लाने की योजना बनाई। इसके लिए उन्हें एक तेज़ और साहसी पक्षी चाहिए था। 🌊 देवताओं का आदेश देवताओं ने इस कठिन कार्य के लिए एक तेज़ और चतुर पक्षी की तलाश की। अंततः उन्होंने कौए को चुना। उसे आदेश दिया गया— “तुम पाताल लोक से जीवनदायी अमृत लेकर आओ, पर ध्यान रहे—तुम स्वयं उस अमृत की एक बूंद भी नहीं पियोगे।” कौआ अपने सुंदर पंख फैलाकर लंबी यात्रा पर निकल पड़ा। उसने कठिन मार्ग पार किया, अंधेरे सुरंगों से गुज़रा और अंततः उस दिव्य अमृत तक पहुँच गया। 💧 एक क्षण की भूल अमृत को अपने पात्र में भरकर वह लौटने लगा। वापसी में उसे तेज़ प्यास लगी। यात्रा लंबी थी, और प्यास असहनीय। उसका गला सूख गया। वह बहुत देर तक खुद को रोकता रहा। पर कमजोरी बढ़ती गई। उसके गले में सूखापन बढ़ता गया। अंततः वह स्वयं को रोक न सका। उसने सोचा—“बस एक बूंद पी लेने से क्या होगा?” उसने अमृत की कुछ बूंदें पी लीं। जैसे ही उसने कुछ बूंदें पीं, उसके शरीर में तीव्र परिवर्तन हुआ। उसके रंगीन पंख काले पड़ गए। चमकदार आभा गायब हो गई। वह चकित और भयभीत हो गया, परंतु उसे अपना कर्तव्य याद आया। वह अमृत लेकर देवताओं के पास पहुँचा। ⚖️ कर्तव्य पूरा, पर दंड भी मिला देवताओं ने देखा कि कौआ अमृत तो ले आया, पर उसकी आज्ञा का उल्लंघन भी हुआ है। उन्होंने पृथ्वी को अमृत से पुनर्जीवित किया, पर कौए के रंग को वापस नहीं किया। उस दिन से कौआ सदा के लिए काला हो गया—एक स्मरण के रूप में कि आदेश और विश्वास का उल्लंघन परिणाम लाता है। 🌿 सीख यह कथा हमें सरल संदेश देती है: संयम रखना जरूरी है विश्वास नहीं तोड़ना चाहिए छोटी गलती भी बड़ा परिणाम ला सकती है ✨ लोकजीवन से जुड़ी कथा कौआ भारत के लगभग हर घर में दिखाई देता है। वह शहरों, गाँवों और खेतों में आसानी से मिल जाता है। इसलिए यह कहानी हमारे दैनिक जीवन से गहराई से जुड़ती है। बच्चों के लिए यह मनोरंजक है। बड़ों के लिए इसमें एक सरल और मूल्यवान सीख छिपी है। ऐसी लोककथाएँ हमें सोचने पर मजबूर करती हैं कि दुनिया जैसी है, वैसी क्यों है। यही जिज्ञासा हमारी संस्कृति और लोकसाहित्य को जीवंत बनाए रखती है। Was this article helpful?Yes0No0 folklorehindi storyकौआनैतिक शिक्षापौराणिक कथाबच्चों की कहानीभारतीय संस्कृतिलोककथा Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ previous post गंगा आरती से आगे: ऋषिकेश की 6 छुपी हुई जगहें जो बहुत कम लोग जानते हैं next post महाशिवरात्रि को “रात्रि” क्यों कहा जाता है, “महाशिव दिवस” क्यों नहीं? Joe You may also like रश्मि की नई जिंदगी और नई पड़ोसन मार्च 16, 2026 उपयोगिता का महत्व: मोर और सारस की प्रेरणादायक... फ़रवरी 19, 2026 विद्वत्ता का अभिमान मार्च 6, 2025 वृंदावन के एक भक्त की कहानी मार्च 6, 2025 कानून का नियम – जीवन का सत्य मार्च 6, 2025