193 दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, भारत में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है। इस पर्व का मूल उद्देश्य एक ही है – अच्छाई की बुराई पर विजय। उत्तर भारत के अधिकांश भागों में यह त्योहार रामलीला के समापन के साथ भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व हिंदू पंचांग के शरद ऋतु में आता है और नवरात्रि के समाप्त होने के बाद मनाया जाता है। नेपाल में भी कुछ स्थानों पर दशहरा मनाया जाता है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि माता सीता नेपाल के राजवंश से संबंधित थीं। दशहरा मनाने की परंपराएं भारत में दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण (रावण के छोटे भाई) और मेघनाद (रावण के पुत्र) के पुतले जलाए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे बुराई का अंत होता है और सकारात्मकता की विजय होती है। भारत के कुछ हिस्सों में, बहनें अपने भाइयों के कानों में नौते (धान के पत्ते) लगाती हैं और उनके अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करती हैं। वहीं, कुछ लोग रावण की संध्या पूजा भी करते हैं क्योंकि उन्हें महाज्ञानी और ब्राह्मण माना जाता है। रावण भगवान शिव के सबसे बड़े भक्तों में से एक थे, इसलिए उत्तर भारत के कुछ ब्राह्मण समुदाय उन्हें पूजनीय मानते हैं। वे गोबर से दस छोटे-छोटे सिर बनाकर, उनके ऊपर खिचड़ी और जल अर्पित करते हैं और पास में दीपक जलाते हैं। यह उनकी विद्वता को श्रद्धांजलि देने का एक तरीका माना जाता है। भारत में दशहरे को भव्य रूप में मनाया जाता है। रामलीला का मंचन पूरे महीने चलता है। मंदिरों को सुंदर फूलों और दीपों से सजाया जाता है। कई स्थानों पर माँ दुर्गा की विशाल प्रतिमाओं के पंडाल लगाए जाते हैं। संपूर्ण देश में यह त्योहार उल्लास के साथ मनाया जाता है। भारत के विभिन्न राज्यों में दशहरे का महत्व मैसूर (कर्नाटक) मैसूर में दशहरा को मैसूरु दशहरा के नाम से जाना जाता है। यह यहाँ का सबसे भव्य पर्व होता है। इस दिन देवी चामुंडेश्वरी (माँ दुर्गा का एक रूप) द्वारा महिषासुर के वध का उत्सव मनाया जाता है। पूरा शहर रोशनी से जगमगा उठता है। दसवें दिन, एक भव्य शोभायात्रा मैसूर पैलेस से बन्नीमंटप तक जाती है, जिसमें माँ चामुंडेश्वरी की प्रतिमा एक स्वर्ण मंडप में विराजमान होती है और उसे एक सजे-धजे हाथी पर रखा जाता है। आंध्र प्रदेश यहाँ पर नवरात्रि के नौ दिनों तक माँ दुर्गा की नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान आयुध पूजा का भी विशेष महत्व होता है। लोग मंदिरों में जाकर दर्शन करते हैं, विशेष रूप से विजयवाड़ा में कनक दुर्गा अम्मावरु मंदिर और तिरुपति में भगवान वेंकटेश्वर मंदिर का दर्शन किया जाता है। पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल में दशहरे को बिजोया दशमी कहा जाता है। यह यहाँ का सबसे बड़ा त्योहार है। पूरे नवरात्रि के दौरान लोग पंडालों में जाकर माँ दुर्गा की भव्य मूर्तियों के दर्शन करते हैं और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लेते हैं। दशहरे के दिन माँ दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है, जिसे भव्य शोभायात्रा के साथ संपन्न किया जाता है। विवाहित महिलाएँ सिंदूर खेला करती हैं, जिसमें वे एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं। देवी दुर्गा को सिंदूर और मिठाई अर्पित करने के बाद, घर के छोटे लोग बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और बड़ों द्वारा उन्हें मिठाइयाँ दी जाती हैं। नेपाल नेपाल में दशहरा को दशैं (Dashain) कहा जाता है। इस दिन छोटे लोग अपने बड़े बुजुर्गों से मिलने जाते हैं। परिवार के दूर-दराज के सदस्य अपने घर लौटते हैं। यहाँ तक कि छात्र भी अपने स्कूल के शिक्षकों से मिलने जाते हैं। बड़ों द्वारा छोटे लोगों को तिलक लगाकर आशीर्वाद दिया जाता है। Was this article helpful?Yes0No0 Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ previous post फुलारी | टाइम मशीन 2 | पांडवाज next post दीवाली – रोशनी का पर्व Jyoti Bora You may also like नवरात्रि पूजा विधि – माँ दुर्गा की आराधना... मार्च 19, 2026 नवरात्रि में अखंड ज्योति क्यों जलाई जाती है? मार्च 18, 2026 नवरात्रि व्रत में क्या खाएं – जब रश्मि... मार्च 18, 2026 नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं मार्च 18, 2026 नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? मार्च 18, 2026 रश्मि और आस्था की नवरात्रि यात्रा – कहानी... मार्च 18, 2026 नवरात्रि के 9 रंग और उनका महत्व मार्च 17, 2026 माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों का विस्तृत वर्णन मार्च 17, 2026 नवरात्रि घट स्थापना कैसे करें – कलश स्थापना... मार्च 17, 2026 रश्मि की नई जिंदगी और नई पड़ोसन मार्च 16, 2026