218 एक दिन एक भक्त ने मुनि श्रेष्ठ से प्रश्न किया कि भगवान राम का विवाह और राज्याभिषेक दोनों ही शुभ मुहूर्त देखकर किए गए, फिर भी न तो उनका दांपत्य जीवन सफल रहा और न ही राज्याभिषेक! “सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहूं मुनिनाथ।हानि लाभ, जीवन मरण, यश अपयश विधि हाथ।।” अर्थात – जो विधि ने निर्धारित कर दिया है, वही होगा! न तो राम का जीवन बदला जा सका, और न ही कृष्ण का! माता सीता राजकुल में पली-बढ़ी, राजघराने में विवाह हुआ, फिर भी भाग्य के कारण वनवास जाना पड़ा। जब श्रीराम जी ने उन्हें त्याग दिया, तो उन्हें आश्रम में रहना पड़ा। महादेव शिव भी सती की मृत्यु को नहीं रोक सके, जबकि महामृत्युंजय मंत्र उन्हीं की स्तुति करता है! न तो गुरु अर्जुन देव जी, न गुरु तेग बहादुर साहिब जी, और न ही दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी उस नियति को टाल सके, जो उनके लिए लिखी गई थी, जबकि वे सभी सक्षम थे! यहां तक कि रामकृष्ण परमहंस भी अपने कैंसर को नहीं रोक सके! न ही रावण अपने जीवन को बदल सका, न ही कंस, जबकि दोनों के पास अपार शक्तियाँ थीं! मनुष्य के जन्म के साथ ही उसका जीवन, मृत्यु, यश, अपयश, लाभ, हानि, स्वास्थ्य, बीमारी, शरीर, रंग, परिवार, समाज, देश-स्थान, सब कुछ पहले से निर्धारित होता है! इसलिए सरल बनो, सहज बनो, और मन, वचन, कर्म से सदा सत्कर्म में लीन रहो! जब जन्म और मृत्यु के लिए कोई मुहूर्त नहीं होता, तो फिर बाकी सब कुछ भी निरर्थक है! सदैव शुभ रहें, सुखी रहें, प्रसन्न रहें! Was this article helpful?Yes0No0 Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ previous post मकर संक्रांति पर्व next post वृंदावन के एक भक्त की कहानी Jyoti Bora You may also like रश्मि की नई जिंदगी और नई पड़ोसन मार्च 16, 2026 उपयोगिता का महत्व: मोर और सारस की प्रेरणादायक... फ़रवरी 19, 2026 कौए का रंग काला क्यों है? – भारतीय... फ़रवरी 12, 2026 रघुनाथजी मंदिर का इतिहास और स्थापत्य दिसम्बर 15, 2025 देवप्रयाग का रघुनाथ मंदिर: जहाँ आस्था, इतिहास और... नवम्बर 26, 2025 विद्वत्ता का अभिमान मार्च 6, 2025 वृंदावन के एक भक्त की कहानी मार्च 6, 2025