264 मकर संक्रांति भारत का एक प्रमुख पर्व है। कुछ स्थानों पर इसे उत्तरायण भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है और खरमास का अंत होता है। इसके साथ ही सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। वर्तमान समय में यह त्योहार 14 या 15 जनवरी को आता है। 14 जनवरी से सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है, इसलिए इसे उत्तरायण (सूर्य का उत्तर की ओर गमन) भी कहा जाता है। भगवान विष्णु की विजय का प्रतीक संक्रांति पर्व ऐसा कहा जाता है कि मकर संक्रांति का पर्व महाभारत काल से मनाया जा रहा है। कुछ कथाओं में इसे भगवान विष्णु की विजय का दिन बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर राक्षसों का संहार कर देवताओं को उनके आतंक से मुक्त किया था। मकर संक्रांति से उत्तरायण का आरंभ होता है, जिससे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। हिंदू धर्म के ग्रंथों में उत्तरायण को देवताओं का समय कहा गया है। मकर संक्रांति पर सूर्य पूजा का महत्व मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। सूर्य देव को कलियुग का साक्षात देवता माना जाता है। मान्यता है कि संक्रांति के दिन सूर्य की उपासना करने से व्यक्ति की प्रतिष्ठा बढ़ती है, शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति का विकास होता है और अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, इस दिन सूर्य की पूजा करने वाले व्यक्ति को सूर्य और शनि से जुड़ी समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है। संक्रांति पर नदी स्नान और दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। भारत में मकर संक्रांति को विभिन्न नामों से जाना जाता है, जैसे: पोंगल, उत्तरायण, खिचड़ी और संक्रांति। भारत के विभिन्न राज्यों में मकर संक्रांति के नाम मकर संक्रांति पूरे भारत और नेपाल में अलग-अलग रूपों में मनाई जाती है। पंजाब और जम्मू-कश्मीर – यहाँ इसे लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है। तमिलनाडु – इसे पोंगल पर्व कहा जाता है। कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश – यहाँ इसे केवल संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार – इसे उत्तरायण और खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। हिमाचल प्रदेश – इसे माघी साजी कहा जाता है। जम्मू – इसे माघी संग्रांद के नाम से जाना जाता है। हरियाणा और मध्य भारत – यहाँ इसे सक्रात और सुक्रात कहा जाता है। ओडिशा – इसे मकर संक्रांति के नाम से ही जाना जाता है। असम – यहाँ इसे माघ बिहू कहा जाता है। उत्तराखंड – इसे घुघुति पर्व के रूप में मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व मकर संक्रांति के पावन दिन गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी भूतकाल और वर्तमान के पाप नष्ट हो जाते हैं। इस दिन दान, तप और जप का भी विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अत्यधिक फलदायी होता है। मकर संक्रांति पर गुड़, तेल, कंबल, फल और तिल का दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। Was this article helpful?Yes0No0 Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ previous post उत्तराखंड में घुघुति त्योहार क्यों मनाया जाता है? next post कानून का नियम – जीवन का सत्य Jyoti Bora You may also like नवरात्रि पूजा विधि – माँ दुर्गा की आराधना... मार्च 19, 2026 नवरात्रि में अखंड ज्योति क्यों जलाई जाती है? मार्च 18, 2026 नवरात्रि व्रत में क्या खाएं – जब रश्मि... मार्च 18, 2026 नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं मार्च 18, 2026 नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? मार्च 18, 2026 रश्मि और आस्था की नवरात्रि यात्रा – कहानी... मार्च 18, 2026 नवरात्रि के 9 रंग और उनका महत्व मार्च 17, 2026 माँ दुर्गा के 9 स्वरूपों का विस्तृत वर्णन मार्च 17, 2026 नवरात्रि घट स्थापना कैसे करें – कलश स्थापना... मार्च 17, 2026 रश्मि की नई जिंदगी और नई पड़ोसन मार्च 16, 2026