45 पहला भाग उस दिन के बाद धीरे-धीरे रश्मि और आस्था के बीच बातचीत बढ़ने लगी। कभी वे साथ चाय पीते हुए बातें करतीं, कभी शाम को थोड़ी देर टहलने चली जातीं। रश्मि को महसूस होने लगा कि आस्था से बातचीत करते-करते वह अपने धर्म और परंपराओं के बारे में बहुत कुछ सीख रही है। और आस्था को अच्छा लगता था कि रश्मि हर बात को समझदारी और जिज्ञासा के साथ पूछती है। उसे यह बिल्कुल नहीं लगता था कि रश्मि को कुछ पता नहीं है। बल्कि उसे लगता था कि रश्मि नई चीजों को समझने के लिए खुला मन रखती है। नवरात्रि की याद एक दिन सुबह-सुबह रश्मि अपनी बालकनी में खड़ी थी। ठंडी हवा चल रही थी और दूर कहीं मंदिर की घंटियों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। अचानक उसे याद आया कि नवरात्रि आने वाली है। रश्मि के मायके में नवरात्रि बहुत श्रद्धा से मनाई जाती थी। उसकी माँ रोज़ पूजा करती थीं और घर में भजन गूंजते रहते थे। लेकिन रश्मि को यह भी महसूस हुआ कि उसने कभी गहराई से यह नहीं समझा कि नवरात्रि का असली महत्व क्या है। इतनी देर में उसे पास वाले घर से मंत्र जाप की मधुर आवाज़ सुनाई दी। यह आस्था का घर था। रश्मि के मन में विचार आया कि उसे आस्था से पूछना चाहिए, क्योंकि उसे पूजा-पाठ में बहुत रुचि है।जब वह पिछली बार उसके घर गई थी, तब उसने देखा था कि आस्था ने अपना मंदिर बहुत सुंदर तरीके से सजाया हुआ था और उसके घर से कितनी सकारात्मक ऊर्जा आ रही थी। एक नई यात्रा की शुरुआत थोड़ी देर बाद रश्मि हिम्मत करके उनके घर की घंटी बजाने चली गई। दरवाज़ा खुला तो सामने आस्था खड़ी थीं। रश्मि ने हल्की मुस्कान के साथ कहा— “नवरात्रि आने वाली है। हमारे घर में भी यह त्योहार मनाया जाता है, लेकिन मुझे इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। क्या आप मुझे इसके बारे में बता सकती हैं?” आस्था के चेहरे पर मुस्कान आ गई। उसने कहा— “बिल्कुल। नवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं बल्कि माँ दुर्गा की भक्ति और आत्मिक शक्ति का पर्व है।” रश्मि ध्यान से सुनने लगी। उसे महसूस हो रहा था कि शायद यह बातचीत उसे नवरात्रि के बारे में बहुत कुछ सिखाने वाली है। और इसी के साथ रश्मि की नवरात्रि की एक नई यात्रा शुरू हो गई। अगला भाग