94 नवरात्रि क्यों मनाई जाती है नवरात्रि का संबंध देवी दुर्गा और असुर महिषासुर की कथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महिषासुर नामक राक्षस ने कठोर तपस्या करके वरदान प्राप्त किया और अत्यंत शक्तिशाली हो गया। देवताओं को पराजित करने के बाद उसने पूरे संसार में आतंक फैलाना शुरू कर दिया। तब सभी देवताओं की शक्तियों से मिलकर माँ दुर्गा का प्राकट्य हुआ। माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक भयंकर युद्ध हुआ और अंत में दसवें दिन माँ दुर्गा ने महिषासुर का वध किया। इसी कारण नवरात्रि के बाद विजयादशमी (दशहरा) मनाई जाती है। ➡ पूरा पढ़ें: नवरात्रि क्यों मनाई जाती है माँ दुर्गा के 9 स्वरूप (नवदुर्गा) नवरात्रि के नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। ये नौ स्वरूप हैं: माँ शैलपुत्री माँ ब्रह्मचारिणी माँ चंद्रघंटा माँ कूष्मांडा माँ स्कंदमाता माँ कात्यायनी माँ कालरात्रि माँ महागौरी माँ सिद्धिदात्री हर देवी का अपना विशेष महत्व और संदेश है। इनकी पूजा से जीवन में साहस, ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा आती है। ➡ पूरा पढ़ें: माँ दुर्गा के 9 स्वरूप नवरात्रि में घट स्थापना नवरात्रि की शुरुआत घट स्थापना या कलश स्थापना से होती है। यह देवी शक्ति के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। घट स्थापना में: मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं एक कलश स्थापित किया जाता है कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं यह परंपरा समृद्धि और शुभता का प्रतीक मानी जाती है। ➡ पूरा पढ़ें: नवरात्रि घट स्थापना कैसे करें नवरात्रि व्रत और फलाहार नवरात्रि में कई भक्त नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। इस दौरान लोग सात्विक भोजन करते हैं और मन को शांत रखने का प्रयास करते हैं। नवरात्रि व्रत में सामान्यतः ये चीजें खाई जाती हैं: फल दूध और दही मखाना साबूदाना कुट्टू या सिंघाड़े का आटा व्रत का उद्देश्य केवल भोजन से परहेज करना नहीं बल्कि मन और आत्मा को शुद्ध करना भी है। ➡ पूरा पढ़ें: नवरात्रि व्रत में क्या खाएं नवरात्रि में पूजा विधि नवरात्रि के दौरान भक्त घरों और मंदिरों में माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। सामान्य पूजा विधि में शामिल हैं: माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करना दीपक जलाना दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भजन और आरती इन नौ दिनों में भक्त देवी से शक्ति, सुख और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। ➡ पूरा पढ़ें: नवरात्रि पूजा विधि नवरात्रि में कन्या पूजन नवरात्रि के अष्टमी या नवमी के दिन कन्या पूजन किया जाता है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। पूजा के दौरान: कन्याओं के पैर धोए जाते हैं तिलक लगाया जाता है उन्हें प्रसाद दिया जाता है पारंपरिक रूप से उन्हें हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद दिया जाता है। ➡ पूरा पढ़ें: नवरात्रि में कन्या पूजन क्यों किया जाता है भारत में नवरात्रि का उत्सव भारत के अलग-अलग राज्यों में नवरात्रि अलग तरीके से मनाई जाती है। गुजरात: गरबा और डांडिया पश्चिम बंगाल: दुर्गा पूजा दक्षिण भारत: गोलू और सरस्वती पूजा उत्तर भारत: व्रत, रामलीला और दशहरा हर क्षेत्र की परंपरा अलग है, लेकिन देवी की भक्ति हर जगह समान है। ➡ पूरा पढ़ें: भारत में नवरात्रि कैसे मनाई जाती है नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश नवरात्रि हमें यह सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, अंत में सत्य और अच्छाई की ही जीत होती है। यह पर्व हमें प्रेरणा देता है: सकारात्मक सोच रखने की आत्मबल बढ़ाने की और देवी शक्ति में विश्वास रखने की नवरात्रि से जुड़े अन्य लेख माँ दुर्गा के 9 स्वरूप नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं नवरात्रि व्रत में क्या खाएं नवरात्रि के 9 रंग रश्मि और आस्था की नवरात्रि यात्रा (कहानी श्रृंखला) नवरात्रि की परंपराओं को समझना कई बार किताबों से ज्यादा अनुभव से संभव होता है। इस कहानी श्रृंखला में हम रश्मि और आस्था की यात्रा के माध्यम से नवरात्रि के महत्व, पूजा विधि और परंपराओं को समझेंगे। भाग 1: रश्मि की नई जिंदगी और नई पड़ोसन आस्था भाग 2: रश्मि और आस्था की नवरात्रि यात्रा भाग 3: नवरात्रि क्यों मनाई जाती है भाग 4: नवरात्रि की पूजा कैसे करें? | सरल विधि और पूरी जानकारी