69 पिछला भाग आस्था मुस्कुराई और कहा- “ये जौ हैं, जो हमने नवरात्रि के पहले दिन बोए थे।” रश्मि ने उत्सुकता से कहा— “लेकिन नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं?” जौ बोने की परंपरा आस्था ने धीरे-धीरे समझाना शुरू किया। सनातन परंपरा में नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के साथ मिट्टी में जौ बोए जाते हैं। इन जौ के अंकुर समृद्धि, जीवन और नई शुरुआत का प्रतीक माने जाते हैं। जैसे-जैसे ये जौ बढ़ते हैं, वैसे-वैसे यह माना जाता है कि घर में सकारात्मक ऊर्जा और देवी की कृपा भी बढ़ती है। जौ उगने का संकेत रश्मि ने उन हरे-भरे अंकुरों को ध्यान से देखा। आस्था ने बताया— “कई लोग यह भी मानते हैं कि जौ की वृद्धि आने वाले समय की स्थिति का संकेत देती है। अगर जौ अच्छे और हरे-भरे उगें, तो इसे शुभ माना जाता है और समृद्धि का संकेत समझा जाता है।” रश्मि की जिज्ञासा रश्मि ने हल्की मुस्कान के साथ कहा— “मुझे तो हमेशा लगता था कि यह बस एक परंपरा है… लेकिन इसके पीछे इतना सुंदर अर्थ है।” आस्था ने जवाब दिया— “हमारे सनातन धर्म में हर परंपरा के पीछे कोई न कोई गहरा अर्थ जरूर होता है, बस हमें उसे समझने की जरूरत होती है।” नवरात्रि में लाल रंग का महत्व इतनी देर में रश्मि की नजर मंदिर में रखी लाल चुनरी पर गई। उसने पूछा— “आस्था जी, मंदिर में हर जगह लाल रंग क्यों होता है?” आस्था ने समझाया— “लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है। माँ दुर्गा को लाल रंग अत्यंत प्रिय माना जाता है।” इसीलिए पूजा में अक्सर उपयोग किया जाता है— लाल चुनरी लाल फूल लाल वस्त्र भक्ति का सुंदर संदेश आस्था ने धीरे से कहा— “देखो रश्मि, नवरात्रि हमें प्रकृति और जीवन के महत्व को समझने का अवसर देती है।” जौ के छोटे-छोटे अंकुर हमें यह सिखाते हैं कि: जीवन हमेशा आगे बढ़ता है हर नई शुरुआत आशा लेकर आती है रश्मि का अनुभव रश्मि कुछ देर उन छोटे-छोटे हरे पौधों को देखती रही। उसे लगा जैसे प्रकृति भी माँ दुर्गा की भक्ति में शामिल हो गई हो। उसने मन ही मन माँ दुर्गा को प्रणाम किया। अब उसे महसूस हो रहा था कि नवरात्रि केवल पूजा का पर्व नहीं बल्कि जीवन के अर्थ को समझने का अवसर भी है। अगला भाग FAQ नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं? नवरात्रि में जौ बोना समृद्धि, नई शुरुआत और देवी कृपा का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि में जौ कब बोए जाते हैं? जौ नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के समय बोए जाते हैं।