162 पिछला भाग 1- माँ शैलपुत्री नवरात्रि के पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा होती है। “शैल” का अर्थ पर्वत होता है, इसलिए इन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री कहा जाता है। स्वरूप- माँ शैलपुत्री का रूप अत्यंत शांत और तेजस्वी माना जाता है। वे दो भुजाओं वाली हैं। हाथों में क्या धारण करती हैं दाहिने हाथ में त्रिशूल बाएँ हाथ में कमल सवारी- इनकी सवारी नंदी बैल है। प्रिय वस्तुएँ– माँ शैलपुत्री को सफेद फूल और घी का भोग प्रिय माना जाता है। आशीर्वाद– इनकी पूजा से स्थिरता, साहस और मानसिक शांति प्राप्त होती है। 2- माँ ब्रह्मचारिणी नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। यह रूप माँ दुर्गा की तपस्या और साधना का प्रतीक है। स्वरूप- माँ ब्रह्मचारिणी अत्यंत शांत और तेजस्वी दिखाई देती हैं। हाथों में क्या धारण करती हैं एक हाथ में जपमाला दूसरे हाथ में कमंडल सवारी- इनकी कोई सवारी नहीं मानी जाती क्योंकि यह तपस्विनी रूप है। प्रिय भोग- माँ को शक्कर और फल का भोग प्रिय माना जाता है। आशीर्वाद- इनकी पूजा से धैर्य, संयम और आत्मबल प्राप्त होता है। 3- माँ चंद्रघंटा नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार का होता है, इसलिए इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। स्वरूप- इनका रूप अत्यंत दिव्य और वीरता से भरा हुआ है। सवारी- इनकी सवारी सिंह है। विशेषता- माँ चंद्रघंटा के दस हाथ होते हैं जिनमें कई दिव्य अस्त्र होते हैं। प्रिय भोग– माँ को दूध और दूध से बने प्रसाद प्रिय माने जाते हैं। आशीर्वाद- इनकी पूजा से साहस और भय से मुक्ति मिलती है। 4- माँ कूष्मांडा नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा की पूजा होती है। मान्यता है कि इन्होंने अपनी दिव्य मुस्कान से पूरे ब्रह्मांड की रचना की थी। स्वरूप- इनकी आठ भुजाएँ होती हैं। सवारी- इनकी सवारी सिंह है। प्रिय भोग- माँ को कद्दू (कूष्मांड) का भोग प्रिय माना जाता है। आशीर्वाद- इनकी पूजा से स्वास्थ्य, शक्ति और समृद्धि मिलती है। 5- माँ स्कंदमाता नवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। ये भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। स्वरूप- इनकी चार भुजाएँ होती हैं और गोद में बाल स्कंद विराजमान होते हैं। सवारी- इनकी सवारी सिंह है। प्रिय भोग- माँ को केले का भोग अर्पित किया जाता है। आशीर्वाद- इनकी पूजा से संतान सुख और पारिवारिक सुख प्राप्त होता है। 6- माँ कात्यायनी नवरात्रि के छठे दिन माँ कात्यायनी की पूजा होती है। इनका जन्म ऋषि कात्यायन की तपस्या से हुआ था। स्वरूप- इनका रूप अत्यंत तेजस्वी और वीरता से भरा हुआ है। सवारी- इनकी सवारी सिंह है। प्रिय भोग- माँ को शहद का भोग अर्पित किया जाता है। आशीर्वाद- इनकी पूजा से विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं। 7- माँ कालरात्रि नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा होती है। इनका स्वरूप भले ही उग्र दिखाई देता है, लेकिन ये अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। स्वरूप- इनका रंग गहरा काला माना जाता है। सवारी- इनकी सवारी गधा है। प्रिय भोग- माँ को गुड़ का भोग अर्पित किया जाता है। आशीर्वाद- इनकी पूजा से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं। 8- माँ महागौरी नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की पूजा होती है। इनका रूप अत्यंत शांत और उज्ज्वल माना जाता है। स्वरूप- इनका वर्ण अत्यंत गौर (सफेद) होता है। सवारी- इनकी सवारी बैल है। प्रिय भोग- माँ को नारियल और मिठाई प्रिय होती है। आशीर्वाद- इनकी पूजा से सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। 9- माँ सिद्धिदात्री नवरात्रि के अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है। ये सभी सिद्धियों की दात्री मानी जाती हैं। स्वरूप- इनकी चार भुजाएँ होती हैं। सवारी- इनकी सवारी सिंह या कमल मानी जाती है। प्रिय भोग- माँ को तिल और हलवा प्रिय माना जाता है। आशीर्वाद- इनकी पूजा से सिद्धि, ज्ञान और सफलता प्राप्त होती है। आस्था ने धीरे से कहा— “देखो रश्मि, माँ दुर्गा के ये नौ रूप हमें जीवन के नौ अलग-अलग संदेश देते हैं। अगर हम इन्हें समझ लें, तो नवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं बल्कि जीवन को समझने का मार्ग बन जाती है।” रश्मि ने श्रद्धा से माँ दुर्गा को प्रणाम किया। उसे अब महसूस हो रहा था कि नवरात्रि की भक्ति केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने का मार्ग है। अगला भाग Was this article helpful?Yes0No0 Festivals of Indianav durganavratriमाँ दुर्गा Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment. Δ previous post नवरात्रि घट स्थापना कैसे करें – कलश स्थापना की विधि और इसका आध्यात्मिक महत्व next post नवरात्रि के 9 रंग और उनका महत्व Joe You may also like नवरात्रि पूजा विधि – माँ दुर्गा की आराधना... मार्च 19, 2026 नवरात्रि में अखंड ज्योति क्यों जलाई जाती है? मार्च 18, 2026 नवरात्रि व्रत में क्या खाएं – जब रश्मि... मार्च 18, 2026 नवरात्रि में जौ क्यों बोए जाते हैं मार्च 18, 2026 नवरात्रि क्यों मनाई जाती है? मार्च 18, 2026 रश्मि और आस्था की नवरात्रि यात्रा – कहानी... मार्च 18, 2026 नवरात्रि के 9 रंग और उनका महत्व मार्च 17, 2026 नवरात्रि घट स्थापना कैसे करें – कलश स्थापना... मार्च 17, 2026 रश्मि की नई जिंदगी और नई पड़ोसन मार्च 16, 2026 नवरात्रि का संपूर्ण मार्गदर्शक – पूजा, व्रत, नवदुर्गा... मार्च 16, 2026