सोमेश्वर महादेव मंदिर

ऐसा माना जाता है कि यह दुनिया का एकमात्र स्थान है जहां ग्यारह वट (बरगद) के वृक्ष पाए जाते हैं। इन ग्यारह वट वृक्षों को रुद्र के स्वरूप माना जाता है। भोलेनाथ यहां इन्हीं रुद्रों के रूप में निवास करते हैं।

महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां एक विशाल मेला लगता है, जो दो दिनों तक चलता है। इस दौरान दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। ऐसा विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है।

मंदिर के बाईं ओर एक बड़ा मैदान है, जहां कई विशाल वट वृक्ष हैं और यहीं पर मेला भी आयोजित किया जाता है। मंदिर में यज्ञ अनुष्ठान के लिए वेदी भी बनाई गई है।

मुख्य मंदिर में एक विशाल शिवलिंग स्थापित है, जिसे पीतल और तांबे की धातु से ढका गया है। मंदिर के अंदर भी एक विशाल वट वृक्ष स्थित है। मंदिर के पीछे अन्य देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर भी बने हुए हैं, जिनमें दुर्गा माता का मंदिर, राधा-कृष्ण मंदिर और हनुमान जी का मंदिर शामिल हैं। इसके अलावा, मंदिर परिसर के आसपास कई तुलसी के पौधे भी लगाए गए हैं।

यहां आकर मन को गहरी शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

हर हर महादेव!

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